मुश्किल हूँ बहुत थोडा सा आसान कर मुझे
मिल जाये जमीं से जो, आसमान कर मुझे
हो फूल सा दिल जिसमे ना हो कोई फरेबी
बच्चों की तरह या खुदा नादान कर मुझे
बढती हैं कैसे रौशनी आँखों की देखना
दो चार दिन ख्वाबों में मेहमान कर मुझे
ये उम्रे-रफ्ता थाम दे और ज्यादा क्या कहूँ
कर इतना करम मौला फिर जवान कर मुझे
पहचान मेरी सिर्फ हिन्दोस्तान हो यारब
कोई नसब ना कोई खानदान कर मुझे.........
मिल जाये जमीं से जो, आसमान कर मुझे
हो फूल सा दिल जिसमे ना हो कोई फरेबी
बच्चों की तरह या खुदा नादान कर मुझे
बढती हैं कैसे रौशनी आँखों की देखना
दो चार दिन ख्वाबों में मेहमान कर मुझे
ये उम्रे-रफ्ता थाम दे और ज्यादा क्या कहूँ
कर इतना करम मौला फिर जवान कर मुझे
पहचान मेरी सिर्फ हिन्दोस्तान हो यारब
कोई नसब ना कोई खानदान कर मुझे.........

waaaah bahot khoob ......
ReplyDelete